मंज़िल पर चल

मंज़िल पर चल

pathway between trees

कुछ करना है, तो डटकर चल।
थोड़ा दुनियां से हटकर चल।

Luck पर तो सभी चल लेते है,
कभी इतिहास को पलटकर चल।

बिना काम के मुकाम कैसा?
बिना मेहनत के, दाम कैसा?

जब तक ना हाॅसिल हो मंजिल
तो राह में, राही आराम कैसा?

अर्जुन सा, निशाना रख, मन में,
ना कोई बहाना रख। जो लक्ष्य सामने है,
बस उसी पे अपना ठिकाना रख।

सोच मत, साकार कर,
अपने कर्मो से प्यार कर,
अपने कर्मो से प्यार कर।

मिलेगा तेरी मेहनत का फल,
किसी और का ना इंतजार कर।

जो चले थे अकेले
उनके पीछे आज मेले है
जो करते रहे इंतजार उनकी
जिंदगी में आज भी झमेले है!!

सोच बदलो, जिंदगी बदलो…
घर पर में, पढ़ते रहें…

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